प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देश के नाम अपने संबोधन में महिलाओं से 'माफ़ी' मांगी और कहा कि विपक्ष को 'सज़ा' मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारा आत्मबल अजेय है, हम हारे नहीं...'।

इस बीच, महिलाओं की गणराज्य में आधी आबादी होने के बावजूद उन्हें समान प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का सवाल उठाया गया है। क्या देश की नीतियों में इस पर विचार किया जाएगा?